मरने का आसान तरीक़ा क्या और कैसी सोच बनाएँ?

मरने का आसान तरीक़ा क्या और कैसी सोच बनाएँ, रियल सच्चाई क्या है?

Welcome, मरने का आसान तरीक़ा क्या और कैसी सोच बनाएँ रियल सच्चाई क्या है? इंसान क्यों ऐसे सोचता है। क्या हतास है या, निराश है यदि हाँ तो अपने लिए नहीं तो दूसरों के लिए ज़िंदा रहे। आज की पोस्ट में हम आपके साथ सांझा करने वाले हैं कि लोग सोचते हैं कि ज़िन्दगी से परेशान हैं। मरने का आसान तरीक़ा कोई है। जी आज इसी पर हम चर्चा करने वाले हैं।

अपनी सोच को पॉजिटिव बनाएँ

जैसे कि दोस्तों आप जानते हैं कि ज़िन्दगी आसान रास्ता, सुख-दुख, हानि लाभ इसी तरह चलती है। क्योंकि यह जीवन का रथ बहुत ही निराला है। इंसान कहीं कभी भी सुखी महसूस नहीं करता है। एक उदाहरण ले लीजिए यदि कोई बहुत पैसे वाला हो तो कभी किसी बात से परेशान है। पैसे से भरपूर है तो कहीं भाई अपनी औलाद से परेशान है,

पैसा लोग बनाते हैं और उस पैसा को भविष्य कुछ नष्ट कर देता है। हमारे जीवन में बहुत दुख आते हैं। दुखों का सामना करना यही एक भी रिश्ता है। हम यह क्यों सोचते हैं कि मरने का आसान तरीक़ा क्या है? नहीं सोचना चाहिए क्योंकि ज़िन्दगी जीना ही एक करना है। करने का परिणाम कुछ भी हो लेकिन इंसान को ज़िन्दगी जी कर अपने कर्म और जिम्मेदारी को समझना चाहिए.

हम यदि परेशान हैं, दुखी है, हम कैसे जिए. जी अपने आपको हम यह समझ ले कि हाँ आज से हमारी ज़िन्दगी चली गई, या नहीं मैं जो ज़िंदा था वह चला गया। अब दोस्तों अपने लिए नहीं तो दूसरों के लिए ज़िंदा रहना सीखें। क्योंकि ज़िंदा रहना ही एक धर्म है। यदि हम अपने ज़िंदा रहते हुए मरने का आसान तरीक़ा ढूँढते हैं। मरने की सोचते हैं, तो फिर हम एक कायर पुरुष कहलाएंगे।

मरने का तरीक़ा हम क्यों

हमारे कायरता होगी और धर्म शास्त्रों में इसका विरोध किया गया है। कानून के आधार पर भी इसका विरोध किया गया है। हम पापी कहलाएंगे। लेकिन नहीं हम क्यों मारेंगे? मरने का तरीक़ा हम क्यों ढूँढ लेंगे। नहीं ज़िंदा रहेंगे। अपने लिए नहीं तो दूसरों के लिए ज़िन्दगी जीना है। अपने आप को गुलाम समझो, अपने आप को हताश समझो, अपने आपको निराश समझो, अपने आप को गायब समझो, मगर अपने लिए नहीं तो दूसरों के लिए ज़िंदा रहना है।

तो मरने का आसान तरीक़ा नहीं ढूँढना चाहिए. क्योंकि लोग परेशान होते हैं, बहुत कुछ नुक़सान हो जाता है, ज़िन्दगी से परेशान हो जाते हैं, वह हम यह सोचते हैं कि इसका कोई मरने का आसान तरीक़ा है ज़िन्दगी को नष्ट करने का। नहीं ज़िन्दगी नष्ट नहीं करेंगे। हम जिएंगे अपने लिए नहीं भला दूसरों के लिए जिएंगे। यदि परिवार में माँ है, बच्चे हैं, भाई है, परिवार है, तो अपने लिए नहीं तो कम से कम उनके लिए ज़िंदा रहना चाहिए.

आपका कोई प्रेम है, प्यार है, दोस्त है, अपने लिए नहीं तो उनके लिए ज़िंदा रहना सीखें। ज़िंदा रह कर आपत्ति-विपत्ति लाभ-हानि नुक़सान हर चीज का सामना करना ही एक वीरता पुरुष की निशानी है। हमें एक वीरता दिखाने हैं और ज़िन्दगी जीना है। हम जिएंगे कम से कम दूसरों काम ज़िन्दगी आएगी।

जिंदा रहकर सार्थक बने

इस ज़िन्दगी में यदि हमने थोड़ा बहुत किसी के साथ अच्छा कर लिया। दूसरों का हमने अच्छा सोच लिया। अच्छे काम बनाए, तो यह हमारी मृत ज़िन्दगी एक जीवित ज़िन्दगी बन जाएगी। एक अच्छी ज़िन्दगी बन जाएगी। इसलिए मरने का आसान तरीक़ा कोई नहीं है। क्योंकि मरना जीना यह तो ऊपर वाले के हाथ में है। पता नहीं है कब किस मोड़ पर किसके साथ क्या हो जाए, क्या नहीं हो जाए.

सच्ची बात यही है कि जीना है जी भर के । हर विपत्ति परेशानी का मुकाबला करना, सामना करना, एक वीरता पूर्ण कर्तव्य निभाना, यही हमारी सोच होना चाहिए. मरने का कोई तरीक़ा नहीं ढूँढना चाहिए. ज़िन्दगी जीना है अपने लिए नहीं तो औरों के लिए. इस ज़िन्दगी को औरों के प्रति हसीन बनाओ. औरों को सुकून दिलाओ. अपने आपको ज़िन्दगी संभालने का एक मौका लो ।

दोस्तों इन्हीं शब्दों के साथ आपके जीवन की सुखद मंगल कामना करते हुए आपका बहुत-बहुत धन्यवाद। ऐसे नेक शब्दों को दोस्तों के साथ सोशल नेटवर्किंग के माध्यम से जैसे फ़ेसबुक व्हाट्सएप टि्वटर इंस्टाग्राम आदि नेटवर्क के माध्यम से दोस्तों के साथ ज़्यादा से ज़्यादा साझा करें। धन्यवाद

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5 thoughts on “मरने का आसान तरीक़ा क्या और कैसी सोच बनाएँ?”

  1. With having so much content and articles do you ever run into any problems of plagorism or copyright infringement?
    My blog has a lot of exclusive content I’ve either created myself or outsourced but it looks like a lot of it is popping up all over the web without my agreement. Do you know any ways to help prevent content from being stolen? I’d certainly appreciate it.

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